Poem On Women Empowerment | Nari Par Kavita | नारी पर कविता

Poem On Women Empowerment
Poem On Women Empowerment

Poem On Women Empowerment | Nari Par Kavita | नारी पर कविता

नारी सशक्तिकरण के लिए कविता आजकल हर कोई तलाश रहा है। इसीलिए आज खासतौर पर हम Best Poem On Women Empowerment हिंदी में लेकर प्रस्तुत हुए हैं। नारी एक ईश्वर की बनाई ऐसी रचना है जिसके बिना इस संसार का अस्तित्व नहीं होता। नारी है तो इंसान का जन्म होगा और ये दुनिया आगे बढ़ेगी। लेकिन आज के वक्त में कन्या भ्रूण हत्या और दहेज जैसी घटनाओं का शिकार होकर नारी अपना अस्तित्व खो रही है। इसीलिए नारी के हित के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। आज हम जो नारी पर कविता लेकर आये हैं इनमें नारी की दशा और नारी की आज के वक्त की सफलता को बयां किया गया है। हमारे कवियों ने नारी पर अपने अपने तरीके से भाव व्यक्त किये हैं। उम्मीद है आपको ये Poem On Nari जरूर पसन्द आने वाली है। पसन्द आने पर आप हमारे पोस्ट के लिंक को शेयर ज़रूर करें।

Poem On Women – नारी दुर्गा का अवतार लिए

जगत जननी, जन्मदायिनी
तुम शक्ति की हो परिभाषा,
हे नारी! तुम पूज्य सदा ही
हर हृदय की हो अभिलाषा।

जटिल तुम्हारा जीवन कितना
अधरों पर मुस्कान लिए,
पीड़ा सहकर तुमने अपने
जीवन कितने वार दिए।

रानी लक्ष्मीबाई अहिल्या
दुर्गा का अवतार लिए,
कितने ही रूपों में आकर
मानव पर उपकार किए।

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सृष्टि की पूरक है नारी
जीवन रक्षक नारी है,
क्यों फिर भी दृष्टि में सबकी
ये नारी बनी बेचारी है।

⇒ Kanya Bhrun Hatya Par KavitaAcid Attack Girl Poem

अगर धरा पर नारी का
स्वरूप समापन होगा,
तो पुरूषों का पृथ्वी पर
न जीवन यापन होगा।

नारी जीवन फुलवारी की
रक्षा को स्वीकार करो,
नारी के सम्मान को समझो
अब न अत्याचार करो।

- गीता राठौर

नारी, रमणी, कामिनी, कान्ता भी कहलाती है,
स्त्री, अबला, औरत और वनिता भी बन जाती है,
कभी बेटी, कभी बहन, कभी प्रेमिका बन जाती है,
जग में पत्नी, बहू, माँ का रूप भी ये दिखलाती है।

जब आता बेटा जग में तो दुनिया जश्न मनाती है,
बेटी की किलकारी सुनकर दुनिया को चिल्लाती है,
जब थकके आते पापा जी गुड़िया ही पानी पिलाती है,
फिर भी क्यों कोख में ही बस बेटियां मारी जाती है।

हर वक्त सुनती वो ताने हर वक्त कोसी जाती है,
तुम बेटी हो सुनकर हर चीजों से वंचित रह जाती है,
सहकर हर एक पीड़ा सोना सा वो बन जाती है,
बनकर त्याग की मूरत भाई पर प्यार लुटाती है।

Poem On Women Empowerment – नारी क्यों बाप के कंधों की बोझ

नारी क्यों बाप के कंधों की बोझ समझी जाती है,
अपने नाजुक कंधों पर घर की जिम्मेदारियां उठाती है,
एक बिखरे मकान को सजाकर सपनों का घर बनाती है,
होती नहीं कठिनाइयाँ दूर उसकी बेटी से बहू बन जाती है।

बिन बच्चों के औरत जग में अधूरी मानी जाती है,
वात्सल्य छलकता औरत में तभी पूरी मानी जाती है,
अपने बच्चों के रोने पर खुद भी आंसू बहाती है,
खुद भूखे रहकर भी वो बच्चे को दूध पिलाती है।

⇒ Poem On MotherPoem On Father

जब जब रोका जग ने इसको खुद से ऊपर बढ़ने से,
जीत शिखर हिमालय का बछेन्द्री पाल बन जाती है,
जब जब बोला जग ने लड़की हो बेलन चौका से ही खेलो,
तब खेलों के मैदानों में सायना नेहवाल बन जाती है।

जब जब बादल की बेड़ियों ने उषा को रोकना चाहा,
तब तोड़ बंदिशों को सारी वो पी टी उषा बन जाती है,
गृहणी थी जो पहले घर की अब सारा देश चलाती है,
साइकिल का वो दौर गया अब वह जेट उड़ाती है।

जब जब उसके स्वाभिमान को दुनिया ठेस पहुंचाती है,
बन लक्ष्मी बाई झांसी की दुश्मन को धूल चटाती है,
मत समझो अबला मुसीबतों में ये दुर्गा बन जाती है,
मातृभूमि की रक्षा में आज रणचण्डी रूप दिखाती है।

देकर देखो एक सुअवसर सब कुछ ये कर जाती है,
इंदिरा सी लौह स्त्री कभी कल्पना सी उड़ जाती है,
जब जब मिला मौका इसे माटी का कर्ज चुकाती है,
हर क्षेत्र, हर खेल में, मर्दो को भी पीछे छोड़ जाती है।

- राम सिंगार "देवदूत"

Nari Par Kavita – नारी ही है देश का मान

नारी इस धरा की सबसे सुन्दर कृति है,
ये माँ है, प्रेम है, करूणा है,
और कला है प्रकृति है,
ये साक्षात परमात्मा का ही रूप है।

ये लक्ष्मी, दुर्गा तो सरस्वती है,
भावों से भरी धीर है,
ये नवाजिश, बख्शिश और ख्वाहिश है,
ये संवेदनाओ को पढ़ने की त्रिनेत्री है।

इसमें लक्ष्मीबाई का अदम्य साहस,
शहीद के वेदना की धैर्यता,
प्रफुल्लित मन की वाटिका,
शब्दों की मिठास,
और नारी ही भाग्य विधाता है।

जब नारी को आता है जोश,
तो अच्छे अच्छो के उडा देती है होश,
जब जब इसने बदला है रूप,
तो स्वतंत्र कराया है देश।

ये जग की है शक्ति,
भाव भजन में भक्ति,
ये जग जननी कहलाती,
सदा बच्चों का मन बहलाती।

नारी में ही गीता ज्ञान,
यही रामायण, बाइबिल और कुरान,
इसका करों सभी सम्मान,
नारी ही है देश का मान।

हे नारी

हे नारी! तू देवी है,
भक्ति है, ज्ञान है, तेजस्वी है,
यही प्रकृति की जननी है,
सहनशीलता की पराकाष्ठा,
तो विश्वास की डोर है।

नारी ही शक्ति की चेतना,
नर की सहचारी, मीरा जैसी,
लक्ष्मीबाई का साहस है।

नारी कविता की सुन्दरता,
चित्रकार की कल्पना,
नाटक की रसधार,
और गीत का अलंकार है।

नारी माँ, बहन, पुत्री का रूप है,
नारी दुर्गा तो चंडिका है,
यही शीतलता और अग्नि है,
चन्द्रमा की सुन्दरता का प्रतीक है।

नया संकल्प हमको करना होगा,
उसमे रंग भरना होगा,
नारी के देवीय स्वरूप को,
हमें ही संवारना होगा।

- प्रमोद कुमार चौहान

Poem On Nari – नारी से ही जुड़ा है अस्तित्व सारा

जीवन का आधार है नारी,
इस धरती का श्रृंगार है नारी,
माँ बहन कहीं चाची मौसी,
इक छोटा सा संसार है नारी।

Nari Par Kavita | नारी पर कविता
Nari Par Kavita | नारी पर कविता
जब जब धरती पे जुल्म बढ़ा,
इसने खत्म किए सब अत्याचारी,
कभी भ्रूण हत्या कभी बलात्कार,
और तेजाब का बनी शिकार है नारी।

इस दुनिया का सृजन हार है नारी,
जीवन में दु:ख सुख की हिस्सेदार है नारी,
अत्याचार के विरुद्ध तलवार है नारी,
स्नेह प्यार तो कभी दुलार है नारी।

- गुरदित सिंह

ईश्वर की बहुमूल्य संरचना है नारी,

इस दुनिया में सबसे बड़ी उपकारी,

नारी से ही जुड़ा है अस्तित्व सारा,

इसके बिन क्या परिवार हमारा।

हर रूप में खुद को ढाल लेती है,
अपनी भूमिका बहुत खूब निभाती है,
अपना प्यार चारों ओर बांटती है,
नारी फूल बनकर खुशबू लुटाती है।

कभी मां बनकर बच्चे का हाथ थाम लेती है,
बड़े प्यार से चलना उसे सिखाती है,
कभी बहू बेटियां बनकर जिम्मेदारी उठाती है,
घर आंगन को खुशियों से महकाती है।

कभी पत्नी बनकर प्रेम से साथ निभाती है,
बहना बनकर कभी भाई का स्नेह पाती है,
हर रूप में खुद को समेट लेती है नारी,
इसी से घर बार इसी से दुनिया हमारी।

- दीप्ति नाग

Women’s Poem In Hindi – नारी सबपे पड़ रही है भारी

आदिशक्ति नारी अपने दुनिया का आधार बनी,
नेकी का अभिनन्दन करने एक अनोखा द्वार बनी,
लक्ष्य को हासिल करेगी चढ़ पड़ी है शिखरों पर,
गम हो चाहे कितना भी खुशी रहती है अधरों पर।

कितना भी कोई रोक ले इनको आगे बढ़कर मानेगी,
हर सांचे की मूरत जग में खुद से गढ़कर मानेगी,
ये नारी ईश्वर की ताकत और साथ सम्मान भी है,
कई मिले सम्मान यहां पर झेले ये अपमान भी है।

हाथों में है चूड़ियां पहनी लेकिन हाथ बंधे नहीं,
फ़र्ज़ का बोझ उठा सके ना कमज़ोर है कंधे नहीं,
कलयुग में आगे है नारी सबपे पड़ रही है भारी,
देख सफलता इनकी खुद चौंक रही है दुनिया सारी।

गर नारी मिट गई तो समझो दुनिया का है अंत करीब,
इसके बिन तो हर एक इंसान रहता है बिल्कुल गरीब,
बेटे से ज्यादा बेटी मां बाप का हौसला बनी हुई है,
आज अपनी इस दुनिया में फिर क्यों अबला बनी हुई है।

- योगेन्द्र "यश"

Conclusion : दोस्तों आज हमने नारी सशक्तिकरण पर कविताएं हिंदी में पेश की। आज की इस पोस्ट Best Poem On Women Empowerment में हमने नारी पर कविताओं का पूरा Collection पोस्ट किया। इन कविताओं में नारी सशक्तिकरण के लिए जो भाव व्यक्त किये गए वो आपको ज़रूर पसन्द आये होंगे। नारी को इस संसार का अस्तित्व बताते हुए कलयुग में नारी की सफलताओं का भी ज़िक्र किया गया। उम्मीद है आज की Hindi Poems आपको जरूर पसन्द आई होगी। अगर आपकी किसी विषय पर कविता पढ़ने की फरमाइश है, तो हमें कमेन्ट करें हम उसे ज़रूर पूरी करेंगे।

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