रक्षा बंधन पर कविताएं | Hindi Poem On Raksha Bandhan

Poem On Raksha Bandhan
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रक्षा बंधन पर कविताएं | Hindi Poem On Raksha Bandhan

दोस्तों हिंदी कविता की शृंखला में आज रक्षा बंधन पर कविताएं लेकर प्रस्तुत हुए हैं। इस पोस्ट Hindi Poem On Raksha Bandhan में हमारे कवियों ने भाई बहिन के प्यार को शब्दों में बयां करने का प्रयास किया है। इन कविताओं में भाई बहन की शरारतें और भाई बहन के रिश्ते का महत्व भी जानने को मिलेगा। राखी का धागा एक सामान्य धागा नहीं बल्कि रक्षा कवच होता है और इसके लिए इस त्योहार का क्या महत्व है, ये भी इन कविताओं में पढ़ने को मिलने वाला है। इसीलिए इस पोस्ट को पूरा पढ़ें और अगर आपको ये रक्षाबंधन पर कविता पसन्द आये, तो Share करना बिल्कुल ना भूले।

राखी की लाज बचाना रे भैया

बहना से राखी बंधाना रे भैया,
राखी की लाज बचाना रे भैया,
अगले बरस जब आएगा सावन,
बहना से मिलने आना रे भैया।

रब से यही मैं बस दुआ माँगती,
रहे तू सलामत बस यही चाहती,
विपदा पड़े जब सुभद्रा बहन पे,
तू भी किशन बन जाना रे भैया,

बहना से राखी बंधाना रे भैया,
राखी की लाज बचाना रे भैया।

रहो साल भर तुम भले मुझ से दूर,
रक्षा बंधन में घर मेरे आना ज़रूर,
उपहार भले तुम लाओ न लाओ,
प्रेम का ये बंधन निभाना रे भैया,

बहना से राखी बंधाना रे भैया,
राखी की लाज बचाना रे भैया।

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चँदा सा चमको नीले गगन में,
खुशियों में हरदम रहो मगन में,
कामयाबी तेरे चूमे कदम को,
खुशी में न भूल जाना रे भैया,

बहना से राखी बंधाना रे भैया,
राखी की लाज बचाना रे भैया।

माना मेरी जब से विदाई हुई है,
ये बहना तेरे घर से पराई हुई है,
कभी मेरी याद सताती तो होगी,
जब याद आये चले आना रे भैया,

बहना से राखी बंधाना रे भैया,
राखी की लाज बचाना रे भैया।

ये बहना तेरे संग पली बढ़ी है,
ये धागा नहीं रिश्तों की लड़ी है,
है भाई नहीं तू सुरक्षा कवच है,
भाई का फर्ज निभाना रे भैया,

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बहना से राखी बंधाना रे भैया,
राखी की लाज बचाना रे भैया।

- राम सिंगार "देवदूत"

एक सूत्र से बंधा हुआ भाई बहिन का प्यार

पृथ्वी पर एक पावन रिश्ता,
विवरण है विस्तार,
एक सूत्र से बंधा हुआ है,
भाई बहिन का प्यार।

देह अलग है रक्त एक ही,
एक प्रेम की भाषा,
यही उदाहरण बन जाते हैं,
और यही परिभाषा।

दिया विधाता ने हम सब को,
यह अनुपम उपहार,
एक सूत्र से बंधा हुआ है,
भाई बहिन का प्यार।

साथ बिताया बचपन फिर भी,
साथ नहीं रह पाते,
प्रेम बीज तो बो लेते हैं,
पुलकित न कर पाते।

हृदय बसा लेते बंधन पर,
बट जाता संसार,
एक सूत्र से बंधा हुआ है,
भाई बहिन का प्यार।

वचन पूर्ण करता हर भाई,
जब संकट में बहिना हो,
समझ विपत्ति स्वयं ही लेता,
जब बहना को कहना हो।

इसी घड़ी में भाई निभाता,
है अपना किरदार,
एक सूत्र से बंधा हुआ है,
भाई बहिन का प्यार।

भाई बहिन का प्रेम सदा ही,
अमर रहे परिवारों में,
बहन प्रेम सीता सा झलके,
स्वच्छ भाव विचारों में।

रिश्तों में न रह जाए,
रिश्तों का व्यापार,
एक सूत्र से बंधा हुआ है,
भाई बहिन का प्यार।

- गीता राठौर

रक्षाबंधन “एक घटित दुखान्त प्रेम”

खड़ी थी इस इंतजार में,
कि भाई आएगा राखी के त्योहार में,
अपनी उंगलियों पर दिन पिरा रही थी,
रह रहकर भाई की याद आ रही थी।

बीच बीच में सिहर सी जाती थी,
जब जब पीहर की याद आती थी,
यही तो भाई बहन का गठबंधन है,
जिसको हम सब कहते रक्षा बंधन है।

भाई भी जाने को तैयार था,
हाथ लिए एक उपहार था,
मन में थोड़ा बेचैन था,
क्योंकि बहन को वहां नहीं सुख चैन था।

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जाते वक़्त मन थोड़ा अधीर था,
जैसे घर गरीब और मन ही अमीर था,
पहुंचने को इस तरह बेचैन था,
आंखों में उसके न अब चैन था।

यही तो भाई बहन का भवबंधन है,
जिसको हम सब कहते रक्षाबंधन है।

ससुराल जनों ने उससे थी दूरी बनाई,
बस उसकी आस एक था भाई,
भाई ने भी यह जिम्मेदारी उठाया था,
पर लड़ने से हमेशा घबराया था।

बहन इस को भली भांति जानती थी,
इसलिए माँ की बात का बुरा नहीं मानती थी,
अपने त्याग की गाथा कभी नहीं बताती थी,
गम का घूंट आंसू दुख के सब पी जाती थी।

यही बाप से प्राप्त बेटी को कन्या धन है,
जिसे हम सब कहते रक्षाबंधन है।

वह झूठी शान वालों के बीच जीवन काट रही थी,
बहुत कुछ सह जाती थोड़ा बहुत बांट रही थी,
सांसारिक बंधनों को निभाती चली गई,
कभी सुख ज्यादातर दु:ख के गीत गाती चली गई।

यह बंधन उसे इस तरह बुरा कचोट गए,
और एक दिन यह सारे रिश्ते पीछे छूट गए,
राखी के बंधन की याद दिलाई थी,
और भाई तक यह संदेश पहुँचाई थी।

कि मेरे पति ने मुझ पर फिर हाथ उठाया है,
और काल्पनिक मां बाप कोई पास नहीं आया है,
भाई ने पहुंचने के लिए संपर्क बढ़ाया था,
इससे पहले ही उसने खुद को आग लगाया था।

इस प्रकार बहनों के त्याग की कहानी लिख गई,
दु:ख ना पहुंचे भाई को इसलिए मर गई,
क्या यही भाई बहन के त्याग बलिदान का अनुबंधन है,
जिसको हम सब कहते रक्षाबंधन हैं।

- अरुण साहू "प्रानू"

बहना को भाई उपहार

सावन का महीना पावन त्योहार है लाता,
बाजार सजता रंग बिरंगे उपहार है लाता,
ससुराल से हर बहिना पीहर के घर आती,
रेशम की डोरी से भरा ये व्यवहार है लाता।

जिस घर में हो बहना वो घर सबसे प्यारा,
भाई चाहे बहिना को मिले वर सबसे प्यारा,
माँ बापू की सबसे चहेती होती घर की बहिना,
इसके रूठ कर मनाने का हुनर सबसे प्यारा।

कलाई पर बंधी डोर भाई की रक्षा ढाल है,
भाई को बुराई से बचाने की सुरक्षा ढाल है,
रक्षा बंधन की डोर होती लक्ष्मण रेखा है,
भाई को सफलता दिलाने की परीक्षा ढाल है।

भाई बहन का रिश्ता होता सबसे प्यारा,
रक्षा बंधन त्योहार है रहता सबसे प्यारा,
भाई की सूनी कलाई इस दिन है सजती,
बहना को भाई उपहार देता सबसे प्यारा।

प्यार का प्रतीक रक्षा बंधन

सावन का महीना आते
ही हमें याद आता है
चरखी,लटटू और झूले
बारह माह मे ये महीना
पवित्र होता जिसमें होती
शिव पार्वती व कृष्ण आराधना।

धरती की होती तपिश कम
मदिरा माँस का होता त्याज्य
इस माह का प्रत्येक दिन
होता एक पावन पर्व।

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पूर्णिमा के दिन मनाते
रक्षा बंधन का त्योहार
जो होता प्रेम व कर्तव्य की
भाई का बहन के प्रति
प्यार का प्रतीक।

जो बांधती भाई की कलाई पर
रेशम की डोरी और संकल्प लेती
स्वयं के देश की
और पर्यावरण की रक्षा का।

ये त्योहार जाति धर्म नहीं देखता
तभी रानी कर्मावती ने
हुमायूँ को बांधा रक्षा कवच
और सिकंदर की पत्नी ने
पति के शत्रु पुरू को राखी बाँध
लिया अपने पति सिकंदर को
न मारने का संकल्प।

राखी ने ही लाज बचाई द्रोपदी की
पर आज भी कई भाईयों की
कलाई रह जाती है सूनी
क्योंकि बहनों को गर्भ में ही
मार दिया जाता है।

जिस देश में कन्या को पूजते हैं
आज उसी कन्या को दुनिया में आने
नहीं दिया जाता है
यह त्योहार हमें याद दिलाता है
कि रक्षा बंधन पर
बहनो का हमारे जीवन में
कितना महत्व है।

- प्रमोद कुमार चौहान

भूल न जाना भैया मुझको

सावन मास की अंतिम तिथि रक्षाबंधन का त्योहार,
भाई बहन का पर्व है ऐसा बहता प्रेम रस की धार,
बांध कलाई पर धागे तिलक लगाती बहना है,
हाथ से अपने खिला मिठाई जताती प्यार बहना है।

आरती उतार आशीष है देती खुशी तेरा संसार हो,
जुग जुग जियो प्यारे भैया जीवन तेरा उजियार हो,
हो न कोई कष्ट तुझको फूलों से भरा रास्ता हो,
राजा बनके राज करे तू प्रियकर तेरा दास्तां हो।

भाई फिर देता बहन को कुछ सौगात है,
धीरे धीरे याद आती भूली बिसरी बात है,
फिर वो बालपन की लीला,
झगड़े एक दूजे से गीला।
रूठने मानने का सिलसिला,
चंद घड़ी में दोहराते हैं।

प्रगाढ़ स्नेह के लहरों में फिर भाई बहन खो जाते हैं,
बहना कराती है भाई से अगले सावन का इकरार,
भूल न जाना भैया मुझको करती रहूंगी इंतज़ार।

- दिग्वजय सिंह "त्यागी"

Conclusion : तो हिंदी कविता के पाठकों आज हमने Hindi Poem On Raksha Bandhan पेश की। इन कविताओं में आपको भाई बहन के रिश्तों का importance पता चला होगा। इनमें बहन भाई के लिए और भाई बहन के लिए क्या मायने रखता है, ये हमारे कवियों ने बखूबी बताया। सभी ने बहुत सुन्दर तरीके से अपनी feeling को बताया। इन कविताओं में नई बात ये रही कि ये latest है और इन्हे हाल ही में लिखा गया है इस तरह की कविताएं आपको अन्य प्लेटफॉर्म पे न के बराबर मिलेगी। उम्मीद है ये रक्षा बंधन पर कविताएं आपके दिल को छू गई होगी। आपके इससे जुड़े क्या विचार हैं, ये हमें कमेन्ट में लिखकर बताएं। साथ ही रक्षा बंधन के अलावा और भी किसी Topic पर आपको कविता पढ़ने का मन हो, तो हमें ज़रूर बताएं ताकि इस प्लेटफॉर्म पर आपको हम हर तरह की कविता मिल सके।

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