Pita Par Kavitaye | पिता पर कविताएं | Poem On Father In Hindi

Pita Par Kavitaye
Pita Par Kavitaye

नमस्ते दोस्तों आज हम हिंदी कविता की कड़ी में “Pita Par Kavitaye” लेकर प्रस्तुत हुए हैं। वैसे हम पहले भी Father’s day poem in hindi प्रस्तुत कर चुके हैं। लेकिन आज फिर हमारे कवियों ने पिता पर कविताएं लिखी है। एक पिता क्या होता है और इनका हमारे जीवन में कितना बड़ा महत्व होता है, ये बात इन कविताओं में पढ़ने को मिलेगी। उम्मीद है ये Poem On Father आपके दिल को छूने वाली है। इसीलिए प्यारे पाठकों इन कविताओं को ज्यादा से ज्यादा Share ज़रूर करना, क्योंकि पिता पर ऐसी भावपूर्ण रचनाएं इंटरनेट पर बहुत कम है।

Pita Par Kavita – इष्ट हैं वो ईश्वर समान

मेरे पिता करुणा निधान,
इष्ट हैं वो ईश्वर समान।
पग पग पर दिए सहारा,
उनपर मुझे है गुमान।

मेरे हर ख्वाहिश के खातिर,
होते रहे जो लहूलुहान।
उंगली थाम के चला मैं जिनका,
जिनसे मिला मुझको पहचान।

Pita Par Kavitaye
Pita Par Kavitaye
इतराता इठलाता हूं की,
कर्मवीर है कितने महान।
चरण रज का धूल में जिनके,
करता गया जग में उत्थान।

बहारों में है ठिकाना अपना,
अथक है उनका गुणगान।
स्नेह समर्पण है उनको,
वो उर मंदिर के हैं भगवान।

त्यागी जीवन दर्पण है वो,
और कितना अब करें बखान।
मेरे पिता करुणा निधान,
इष्ट हैं वो ईश्वर समान।

- दिग्वजय सिंह त्यागी

Poem On Father – खुद बूढ़ा हो जाता है

छोटा हो या बड़ा सब काम करने वाला बन्दा होता है,
ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाला वो अथक कंधा होता है।
जब कभी लगता है मेला किसी नजदीक के गाँव में,
गाड़ी न हो तो क्या हाज़िर पिता का कंधा होता हैं।

माँ से बिल्कुल जुदा हर पिता का जज्बात होता है,
रोटी कमाने के लिए उनका बड़ा खयालात होता है।
अपनी जरूरत, इच्छाएं सबसे अंतिम रखता पिता,
सर्वप्रथम सुधारना उसे परिवार का हालात होता है।

पिता की जरूरतें छोटी जिम्मेदारियां बड़ी होती है,
काँटों को खुद झेलता है जो राहों में पड़ी होती है।
उसके पसीने से ही सींची जाती है घर की बगिया,
मुसीबतों को दूर करता जो घर में खड़ी होती है।

नहीं सोचता कभी बुरा पिता उसकी आवाज कठोर है,
माँ है मीठी लोरी रातों की पिता नई सुबह की भोर है।
ज़िन्दगी की हर कठिनाइयों को हमें झेलना सिखाता,
उसकी नज़र घर के हर दुःख़ हर ख्वाइश की ओर है।

घर की हर ख़ुशी हर सपना को पिता अपना बनाता है,
धूप,गर्मी ,तूफान के थपेडों में भी धैर्य पिता अपनाता है।
गम की कोई भी आँच न कभी घर को आने देता पिता,
परिवार को छाया मिले इसलिए बरगद पेड़ बन जाता है।

एक घर बनाने के लिए जीवन भर त्याग करता है,
बच्चों को पढ़ाने के लिए अरमानों को त्याग करता है।
बच्चों के सफल बनाने में वो खुद बूढ़ा हो जाता है,
वृद्धा अवस्था में पुत्र ही पिता का परित्याग करता है।

- राम सिंगार "देवदूत"

Poem On Father In Hindi – शिकायत नहीं करते

पिता.....
जो नजारें खुद कभी न देख सके,
वो कंधों पर बिठाकर हमें दिखा देते हैं,
जो सबक गुरुजी न सिखा सके ,
वह बातों ही बातों में सिखा देते हैं।

पिता.....
अक्सर हमसे प्यार से पेश आते हैं,
कभी-कभी आंखें भी दिखाते हैं,
उन्हें मालूम है कब क्या करना है,
तभी तो सब कुछ सही सही कर पाते हैं।

पिता.....
अपनी ज़रूरतों पर पर्दा डालकर,
वो हमारी ख्वाहिश पूरी करते हैं,
पूरे घर को अच्छे से संभाल कर ,
बड़ी मजबूती से बांध लिया करते हैं।

पिता.....
घर चलाने को अक्सर हमसे दूर चले जाते हैं,
हमें खुश रखने को लाखों गम सह जाते हैं,
डराते हैं, धमकाते हैं, आंखे भी दिखाते हैं,
पर लगती है चोट तो मरहम भी लगाते हैं।

पिता.....
बच्चों में अपनी छवि अक्सर खोजा करते हैं,
उनकी मुस्कान में अपनी खुशी समझा करते हैं,
अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया करते हैं,
उंगली पकड़कर चलना सिखाया करते हैं।

पिता.....
अक्सर बदन में दर्द लिए वो कमाने जाते हैं,
तब जाकर अपने बच्चों को खाना खिला पाते हैं,
वो कभी हमारी तरह शिकायत नहीं करते हैं,
हो चोट कितनी भी गहरी वो आह तक नहीं भरते हैं।

- निरंजन राठौड़ "नर"

Father’s Poem – उजाले की ओर का चिराग

पिता प्यार है,
दुलार है सपनो की बहार है,
विचारों के रूप में संस्कार है,
इन्ही से जीवन में जीने की पतवार है।

पिता साहस है,
सफलता का प्रयास है,
संवेदनाओं का अहसास है,
इन्ही से हिम्मत और विश्वास है।

पिता मान है,
परिवार की शान है,
पत्नी का अभिमान है,
बच्चों का आत्म स्वाभिमान है।
Poem On Father
Poem On Father
पिता सुरक्षा है,
किताब में छपी शिक्षा है,
परिणाम पाने की परीक्षा है,
दिये गये वचन के रूप में दीक्षा है।

पिता पूजा है,
परिवार की ऊर्जा है,
अनुशासन में कड़ी सजा है,
इनके आगे प्रभु का स्थान दूजा है।

पिता भक्ति है,
बहनों के प्रति आसक्ति है,
परिवार की सबसे बड़ी शक्ति है,
साक्षात परमात्मा के रूप में अभिव्यक्ति है।

पिता राग है,
पत्नी की माग व सुहाग है,
स्वयं की खुशियों का त्याग है,
अँधेरे से उजाले की ओर का चिराग है।

Father’s Poem In Hindi – सभी का आत्मज्ञान

आज पिता दिवस पे,
मेरा रोम रोम कुर्बान है।
पिता के चरणों में ही,
मेरा जीवन विद्यमान है।

इनके पास धैर्य और,
संयमता का खजाना है।
और यही परिवार के,
सदस्यों के कर्म प्रधान है।

इन्ही के रहने से सबकी,
साहस और हिम्मत है।
क्यों कि यहीं समस्त,
परिवार की पहचान है।

पिता ही परिवार का,
मुखिया व प्रधान है।
यही सभी बच्चों का,
मान और सम्मान है।

परिवार पर आई वेदना,
के संकट मोचन है।
सभी पर समान भाव,
रखने वाले लोचन है।

इन्ही में भक्ति शक्ति,
और सभी का दुलार है।
ये ही परिवार की शान,
व विचारों की उड़ान है।

पिता ही बच्चों और,
माँ के बीच मध्यमान है।
बच्चों को प्राप्त हुई,
सफलता का पायदान है।

इनके पास ज्ञान और,
अनुभव का भण्डार है।
इन्ही की छत्रछाया में,
सभी का आत्मज्ञान है।

इन्हे भी पढ़ें -
• Papa Status In HindiFather's day poem in hindi

- प्रमोद कुमार चौहान

Conclusion : तो आज हिंदी कविता की कड़ी में हमने पिता पर कविताएं पेश की। इन कविताओं में वाकई पिता कितना महत्वपूर्ण शख्स होता है हमारे जीवन में ये पता चला। साथ ही ये भी आभास हुआ कि पिता संतान के लिए क्या होता है और क्या करता है। खुद तकलीफ सहकर संतान को सब कुछ सुख सुविधा देना पिता की खास विशेषता होती है। एक पिता का क्या मूल्य होता है ये इनमें बखूबी कवियों ने लिखा। इन कविताओं की खासियत ये है कि ये कवियों की स्वरचित है। यही सीख हमें इन कविताओं से मिलती है। आशा करते हैं ये कविताएं आपको जरूर अच्छी लगी होगी। अगर पिता पर लिखी गई रचनाओं की एक पंक्ति भी भाव विभोर कर गई हो, तो अपने विचार कमेन्ट बॉक्स में ज़रूर बताए।

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