लक्ष्य पर कविता | Hindi Poem On Lakshya | Motivational Poem

Lakshya par kavita
Lakshya par kavita

लक्ष्य पर कविता | Hindi Poem On Lakshya | Motivational Poem

आज Motivational poem की कड़ी में हम लक्ष्य पर कविता लेकर प्रस्तुत हुए हैं। हर इंसान का अपने जीवन में कोई न कोई लक्ष्य ज़रूर होता है, जिसे पूरा करने के लिए वो हर सम्भव प्रयास करता है। लक्ष्य आखिर क्या है, ये बताने के लिए आज Hindi Poem On Lakshya पर हमारे कवियों ने कलम चलाई है। ये हिंदी कविताएं लक्ष्य पर लिखी गई है, जिनमें कवियों ने अपने अपने तरीके से लक्ष्य को परिभाषित किया है। हमें आशा है कि Hindi Poems आपको अपने लक्ष्य के प्रति मोटिवेट ज़रूर कर देगी। अगर आप ज़रा भी खुद को प्रेरित महसूस करें, तो इन्हें share करना मत भूलियेगा।

लक्ष्य पर कविता – कांटो के पश्चात मिलेगी

रुकना नहीं पथिक राहों में,
लक्ष्य को अपने पाना है,
अंगारे हो या हो पत्थर,
आगे बढ़ते जाना है।

तपता सूर्य कभी न थकता,
जग में करता उजियारा,
लक्ष्य सूर्य का भी होता है,
मिट जाता सब अंधियारा।

Lakshya par kavita
Lakshya par kavita
लक्ष्य में कितने ही बाधक हो,
किंचित न तुम घबराना,
कंटक जाल बिछा हो फिर भी,
आगे ही चलते जाना।

कांटो के पश्चात मिलेगी,
पुष्पों की सुंदर फुलवारी,
इतने में ही भ्रमित न होना,
रखनी होगी मेहनत जारी।

⇒ Motivational Poem In HindiBhukhmari Poem In Hindi

अन्तिम चरण में फल पाकर,
लक्ष्य सुसज्जित होगा,
उस दिन तेरा जन जन में,
नाम सुशोभित होगा।

- गीता राठौर

Hindi Poem On Lakshya – अपनी जय कर

हो कुछ भी करना ज़िंदगी में लक्ष्य अपना तय कर,
ज़िंदगी एक खेल है तू ना हार का अपने भय कर,
सोच मत इतना बस अपने सफ़र में तू निकल पड़,
आये जितनी बाधाएँ निश्चय कर अपनी जय कर।

कहाँ रह गई कमी पहले कमी को अपनी तय कर,
परख ले हर चाल को आँखों को अपनी संजय कर,
हो अडिग अपने पथ पर निरंतर तू आगे बढ़ता चल,
हौसला और धैर्य से हर कमी पर अपनी विजय कर।

न भेद सके दुश्मन कोई किले को अपनी अजेय कर,
तू गिर कर फिर संभल खुद को अपनी मृत्युंजय कर,
करनी होगी कड़ी साधना पाना अगर है सफलता तुम्हे,
भेदना है तुम्हे लक्ष्य तो इंद्रियों पर अपनी विजय कर।

लक्ष्य पर रख निशाना खामियों को अपनी पराजय कर,
तू पैरों के छाले पर नहीं सफलता पर अपना ध्येय कर,
अपने भाग्य पर नहीं पर अपने कर्म पर विश्वास कर,
शत्रु को मत आँक कम और मन को अपने निर्भय कर।

- राम सिंगार "देवदूत"

Motivational Poem – मुश्किलों से मैं लडूंगा

लक्ष्य की ओर बढ़ते रहेंगे कदम,
हौसलों में अपने भरते रहेंगे दम,
मंज़िल मिले नहीं जब तक हमें,
अपने सफर पर चलते रहेंगे हम।

ठाना मन में जो मैं करूँगा,
असफलता से ना मैं डरूंगा,
सफर में आती है मुश्किलें,
हर मुश्किलों से मैं लडूंगा।

हम नदी बन के बहते रहेंगे,
समस्या भले ही सहते रहेंगे,
बस थोड़ी दूर यही कहते रहेंगे,
हम अपने सफर पर चलते रहेंगे।

किसी चुनौतियों से ना मैं डरूंगा,
हर परिस्थितियों से जरूर लडूंगा,
तूफ़ानो से भी मैं टकरा जाऊंगा,
पर ठाना है मंज़िल जरूर पाऊंगा।

⇒ Dahej Poem In HindiAll Hindi Poems

माना कुछ लोग हमें आजमाएंगे,
ज़माने को कुछ कर के दिखाएंगे,
बन के कामयाबी का दीपक,
एक दिन आसमान में हम जगमगाएंगे।

- बिलाल राय "आसनसोल"

Lakshya Poem In Hindi – त्यागी ने तप किया है

लक्ष्य को हासिल करने को,
सफलता की सीढ़ी चढ़ने को,
मैंने दृढ़ संकल्प लिया है,
निरंतर आगे बढ़ने को।

करना है कठिन काज हमें,
जीवन पर है नाज हमें,
मैंने राह को देख लिया है,
परोपकार के पथ पर चलने को।

"<yoastmark

लक्ष्य को हासिल करने को,
सफलता की सीढ़ी चढ़ने को,
मंज़िल आज या कल मिलेगी,
कभी तो प्रेममय दुनिया खिलेगी।

मैंने वैर बलिदान किया है,
समाज को निर्मल करने को,
लक्ष्य को हासिल करने को,
सफलता की सीढ़ी चढ़ने को।

मन निर्मल पुलकित हमारा है,
यह जग बहुत ही प्यारा है,
त्यागी ने तप किया है,
जग में उजियारा करने को।

लक्ष्य को हासिल करने को,
सफलता की सीढ़ी चढ़ने को।

- दिग्वजय सिंह त्यागी

Poem On Lakshya In Hindi – बिना थके चलते ही रहना

जीवन में संघर्ष से हमें घबराना नहीं चाहिए,
परिश्रम करने से जी कभी चुराना नहीं चाहिए।

तपिश कितनी भी हो सागर कभी सूखता नहीं,
सफलता मिलेगी हौसला छोड़ना नहीं चाहिए।

जब वर्षा अधिक हो और नदियां उफान पर,
दृख्यत बबूल की तरह अड़ना नहीं चाहिए।

मुसीबत आती पर ठहर के चली भी जाती है,
ऐसे समय में कभी धैर्य को खोना नहीं चाहिए।

ये सच है कि एक सा दिन जीवन में रहता नहीं,
हौसला रख आगे बढ़ कभी हारना नहीं चाहिए।

मौसम की तरह बदलता है जीवन का मिजाज,
करते रहे अच्छे काम पर घबराना नहीं चाहिए।

साध लिया एक बार लक्ष्य यदि अपना तो,
दुसरे रास्ते पर हमें चलना नहीं चाहिए।

आंधी बाढ़ या फिर आये तूफान ही क्यों न,
अपने लक्ष्य से कभी भटकना नहीं चाहिए।

मेरे एक एक पग से ही लम्बी मील का सफर तय होना है,
मेरा लक्ष्य कठिन पर दृढ़ संकल्प के आगे बहुत बोना है।

मेरी मंज़िल अभी दूर है पर पहुंच से नहीं,
मुझे बिना रूके बिना थके चलते ही रहना है।

मुझे मालूम है रास्ते में कई रुकावटें होगी,
पर इन रुकावटों से पार पा चलना ही चलना है।

मुझे तालाब के पानी की तरह रूक नहीं सड़ना है,
मुझे नीर की भांति बन के बहना ही बहना है।

- प्रमोद कुमार चौहान

Lakshya Kavita – लक्ष्य बड़ा है

गिरता चल उठता चल,
निरंतर तू बढ़ता चल,
भेद दे तू लक्ष्य को,
भले ही वो अप्रत्यक्ष हो।

मुश्किलों का पहाड़ बड़ा है,
इसीलिए तो लक्ष्य बड़ा है,
कारवाँ मिले तो सही,
न मिले तो अकेले चल,
कैसी भी परिस्थिति हो,
सबको तू झेले चल।

मुश्किलों में तू खुद से लड़ा है,
इसीलिए तो लक्ष्य बडा है।

बन सबल बढ़ा आत्मबल,
फिर निकल तू फिर चल,
लक्ष्य भेद की लगन बड़ी है,
माना कि यह मुश्किल घड़ी है,
पहचान ढूंढने को चल पड़ा है,
इसीलिए तो लक्ष्य बड़ा है।

- अरुण साहू

Conclusion : हिंदी कविता के पाठकों आज हमने Motivational poem की सीरीज में लक्ष्य पर कविता पेश की। इन कविताओं में हर एक कवि ने बखूबी लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इन कविताओं के एक एक शब्द में एक नई ऊर्जा मिली होगी। साथ ही लक्ष्य को अवरोध पार करके किस तरह प्राप्त करना है, ये भी कवियों ने अपनी शैली में बखूबी बताया है। इससे हमारा उद्देश्य यह था कि हम आपको अपने लक्ष्य के प्रति सजग कर पाए। लक्ष्य बिना आपका जीवन निर्जीव सा रहता है और आपको अपने लक्ष्य को कैसे पाना है, ये भी इन हिंदी कविताओं से पता चलता है। आपको ये Hindi Poems कैसी लगी और आपके क्या विचार हैं, ये हमें Comment में बताना ना भूलें। साथ ही ऐसी कविताएं पढ़ने के लिए रोज़ाना पधारे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here