Hindi Poem On God | ईश्वर पर कविता | Devotional Poem Hindi

Hindi Poem On God
Hindi Poem On God

Hindi Poem On God | ईश्वर पर कविता | Devotional Poem Hindi

दोस्तों जैसा कि हिंदी कविता हम रोज़ाना प्रस्तुत कर रहे हैं, इसीलिए आज की पोस्ट Hindi Poem On God में हम ईश्वर पर कविता लेकर आये हैं। आपने अभी तक लगभग हर तरह की कविता हमारे प्लेटफॉर्म पर पढ़ी होगी। लेकिन आध्यात्मिक कविता पढ़ने का अपना ही एक अलग आनन्द होता है। आज हमारे कवियों ने बढ़ चढ़कर God पर कविता को लिखा है। इनमें ईश्वर के प्रति श्रद्धा और भक्ति का भाव देखने को मिलेगा। हमें उम्मीद है इन Hindi Poetry को पढ़कर आपके मन को एक सुकूँ और शांति का अनुभव होगा। हम आपके लिए यहां ऐसी कविताएं पेश कर रहे हैं, जो आपको कहीं नहीं मिलेगी। क्योंकि इन्हें हाल ही में रचनाकारों के द्वारा लिखा गया है। अगर ये Devotional Poem का संग्रह पसन्द आये, तो अपने चाहने वालों को Share करना ना भूलियेगा।

तू ही निरंकार है

तू ही आकर है मेरा प्रभु और तू ही निरंकार है,
कण कण में तू ही बसा जीवन का आधार है।
सुख भी तेरी कृपा है दाता दुःख़ तेरा प्रसाद है,
पत्ता न हिलता तेरे बगैर सब तेरा चमत्कार है।

तुझसे ही है उजाला प्रभु तुझसे ही अंधकार है,
तूने रचा हम सबको ईश्वर तू ही मूर्तिकार है।
हम लाख समझ ले इस तन, धन को अपना,
हर तन हर प्राण पर प्रभु बस तेरा अधिकार है।

तेरी कृपा हो जिसपर प्रभु उसको क्या दरकार है,
जिस नौका के तुम खेबैया भाव सागर वो पार है।
हीरे मोती सोने चाँदी से सजा लो चाहे कोई तन,
तेरे बिना उस तन में फिर फिका हर अलंकार है।

Hindi Poem On God
Hindi Poem On God
ये पद पदवी, ये धन दौलत, सब झूठा अहंकार है,
सब कुछ है माया, मानस व्यर्थ तेरी जयकार है।
पाना है तो सेवा कमा और थोड़ा पूण्य कमा ले,
लेकर आया न ले जा सकेगा मोह माया बेकार है।

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तू ही सेवा, तू ही भजन, तू ही गीत और गीतकार है,
तू ही थल में तू ही नभ में तू बारिश की बौछार है।
सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञानी, तेरे कितने रूप हैं,
तेरी महिमा बस तू ही जाने तेरी महिमा अपार है।

- राम सिंगार "देवदूत"

हे परमात्मा

हे परमात्मा! आपके है अनेक रूप,
कहीं है छांव और कहीं पड़े धूप।
हर एक कण में सिर्फ आप ही आप,
नाम अनंत पर आप ही है ब्रह्मरूप।

आप है दुःख हरता करे सब आराधना,
रहे सब निरोगी है ऐसी प्रभु प्रार्थना।
हम सब फंसे मोह माया के जाल में,
इच्छा हो सभी की पूरी है यही कामना।

हे ईश्वर! आप ही है सबके पालनहार,
करो कृपा और दे दो ज्ञान का उपहार।
हम सब तो है अज्ञानी और है नादान,
मन में करो उजाला मिटा के अंधकार।

आप ही अल्लाह यीशू और भगवान,
राम करे पूजा और रहीम करे अजान।
आदमियों ने भेद कर धर्म जाति बनाई,
पर आपकी दृष्टि में हम सब है इंसान।

आप है करूणानिधान ज्ञान गुन सागर,
गहरा है ज्ञान आपका आप है क्षीरसागर।
मेरी यही पुकार विनती सुनलो एक बार,
दया कर प्रभु लगा दो मेरी नाव भव सागर।

बुरी बात है

डॉक्टर को ईश्वर कहना बुरी बात नहीं,
पर ईश्वर को ईश्वर,
ना मानना बुरी बात है।

रोज प्रवचन सुनना बुरी बात नहीं,
इंसान हो के भलाई,
ना करना बुरी बात है।

तीर्थयात्रा पर जाना बुरी बात नहीं,
पर माँ बाप की सेवा,
ना करना बुरी बात है।

धर्मानुसार पूजा करना बुरी बात नहीं,
पर ईश्वर को एक,
ना मानना बुरी बात है।

घर मे मंदिर बनाना बुरी बात नहीं,
देवस्थान जाकर पूजा,
ना करना बुरी बात है।

सत्संग पर जाना बुरी बात नहीं,
लेकिन उस पर अमल,
ना करना बुरी बात है।

धार्मिक किताबों को पढ़ना बुरी बात नहीं,
ज्ञान का अनुसरण,
ना करना बुरी बात है।

अच्छे संस्कार सीखना बुरी बात नहीं,
उसका पालन,
ना करना बुरी बात है।

कुछ संतो को सम्मान देना बुरी बात नहीं,
अच्छे संतो को अच्छा,
ना कहना बुरी बात है।

खूब धन कमाना बुरी बात नहीं,
पर धर्म पर दान,
ना करना बुरी बात है।

- प्रमोद कुमार चौहान

मेरे प्रभु

जब मेरे प्रभु ने यह स्वर्णिम संसार बनाया था,
मुस्कुराते हुए मेरी धरती मां का आकार बनाया था,
चांद तारों से उसने आसमान सजाया था,
फिर प्रकृति की पावन गोद में इंसान थमाया था।

पर हमने उस प्रकृति को ही नोच लिया,
जिसने जीवन उपहार दिया उसे ही खरोंच लिया,
सोचा मेरे प्रभु ने ए हाय मैंने क्या बना दिया,
इतने में सब ने अपना अलग-अलग भगवान बना लिया।

ताकत पाकर इंसान और ज्यादा मचलने लगा,
अब तो यह सिलसिला ही अनवरत चलने लगा,
मजहब के नाम पर हम इतने दंगे कर गए,
उस परमपिता के लाखों बेटे मर गए ।

कुछ विषधरों के लिए लाशों की बनी सीढ़ियां,
धर्म के नाम पर कट मरी कई पीढ़ियां,
विधर्मियों के कटे मस्तक अब सजने लगे,
जिहाद को हम जन्नत का रास्ता समझने लगे।

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यह सब देख मेरे प्रभु सहम गए,
हम नहीं समझेंगे यह वो समझ गए,
उन्नति की बहुत हमने ज्ञान विज्ञान में,
पर टाल नहीं सकते जो लिखा है विधि के विधान में।

जब बच्चे कई बार टोकने पर भी रुका नहीं करते हैं,
पिता रुक जाते हैं बार-बार टोका नहीं करते हैं,
फिर इसका समाधान सिर्फ दंड हुआ करता है,
सुनो! परमपिता का दंड बड़ा प्रचंड हुआ करता है।

रुक जाओ वरना रोओगे तुम जब सिर पर काल मंडराएगा,
ना डराएगा, ना समझाएगा, अब वह प्रलय लाएगा,
तुम रुक जाओ अभी क्योंकि फिर वह नहीं रुकेगा,
तुम अभी सुन लो उसकी वह सब का बाप है किसी की नहीं सुनेगा।

कण-कण को ईश्वर मान लिया

सृष्टि के मूल में वह निराकार निर्विकार ईश्वर है,
इस सृष्टि का पालनहार वह परमपिता परमेश्वर है,
वह सर्वश्रेष्ठ रचनाकार है जिसकी रचना यह संसार है,
वह तारणहार जन्मदाता ही अंततः करता संहार है।

जिसने कण-कण को ईश्वर मान लिया,
बस वही है जिसने निराकार का आकार जान लिया,
केवल वही ईश्वर दर्शन में समर्थ है ,
अन्यथा मंदिर मस्जिद गिरजाघर में पैर घिसना व्यर्थ है।

मानो तो संसार के हर कण में ईश्वर है,
हमें बस मानने की ही तो जरूरत है,
न तेरा न मेरा वह सबका ईश्वर है,
और ना मानो तो साकार भी पत्थर की मूरत है।

सबको एक तराजू में तोलता वह सब का सेठ है,
दुखियों की सेवा ही उसकी सबसे बड़ी पूजा है,
प्रेमभाव से पिघल ना ही उसका भेद है ,
प्रेम से बढ़कर प्यारा न उसको कोई प्रसाद दूजा है।

- निरंजन राठौड़ "नर"

आध्यात्म गीत

रे मानव तू चल पड़ अब आध्यात्म की ओर,
छोड़ जगत के मोह माया को रख इक ओर।
रे मानव तू.......

निष्काशित कर अपने मन का बैठा है जो चोर, बदल दे अपना दृष्टिकोण दे नई इसे तू भोर।
रे मानव तू.......

Devotional Poem
Devotional Poem
निर्मल मन कर निर्मल वाणी, निर्मल कर तू, काया,कल कल करती बहती गंगा,
चल गंगा की और।
रे मानव तू......

मेरा मेरा करता फिरता, जिसमें क्या है तेरा,
तेरा तुझमें करे बसेरा, नहीं तेरा कोई और।
रे मानव तू.....

ये संसार नहीं घर तेरा, ओ मुरख अज्ञानी,
छोड़ तू ये संसार ओ प्यारे,
आजा मेरी ओर।
रे मानव तू.......

हे ईश्वर! क्यों मौन है तू

संध्या परिवर्तन करने वाला
कौन है तू?
मेरे हृदय को जोड़ने वाला
कौन है तू?
असमंजस ही असमंजस था
जीवन को दर्शाने वाला
कौन है तू?

उथल पुथल और जीर्ण क्षीण था
ये मानस पटल
मानस पटल हिलाने बाला
कौन है तू?
अज्ञानता थी विशेषता इस जीवन की
ज्ञान का दीप जलाने वाला
कौन है तू?

खोज रही थी जिसको प्रतिपल
कहकर ये कि
कौन है तू?
अंतर्मन में रहने वाला
हे ईश्वर! क्यों मौन है तू?

- गीता राठौर

ईश्वर सत्य सुंदर

ईश्वर सत्य सुंदर प्रेममय धारा है,
विमल सहज आनंदराशि न्यारा है।
रग-रग में निवास है करता,
पग-पग पर देता सहारा है।

ईश्वर सत्य सुंदर प्रेममय धारा है,
सरस सुलभ सार्थक है सर्व,
हरसू मिटाता अंधियारा है,
ईश्वर सत्य सुंदर प्रेममय धारा है।

⇒ All Hindi Poems

काल क्लेश दारुण दुःख हर्ता,
कर्ता धार्ता शाखा हमारा है,
ईश्वर सत्य सुंदर प्रेममय धारा है,
त्यागी बड़भाग्य है तेरा,
पुलकित जीवन सारा है,
ईश्वर सत्य सुंदर प्रेममय धारा है।

- दिग्विजय सिंह "त्यागी"

ईश्वर एक विश्वास

हे ईश्वर,
तू व्यथा प्राण
चश्मो आब,
गिर कंदराओ से
निद्रा ख्वाब।
हे ईश्वर,
तू सरस शील
हुनरबाज,
बदलता पल में
जिसका मिजाज।

हे ईश्वर,
तू धरती हर कण-कण
विद्यमान,
निर्जन निर्बल सब
तेरे स्वाभिमान।
हे ईश्वर,
तू है नदियों की
कल-कल,
पर्वत शिखर और
भूतल।

हे ईश्वर,
तू भोर लालिमा
धूप किरण
हर जन जीवन
और मरण।
हे ईश्वर,
हे प्रकाश के पुञ्ज
जीवन का आधार,
तुमको है समर्पित
प्राप्त यह संसार।

- अरुण साहू "प्रानू"

Conclusion : प्यारे हिंदी कविता के पाठकों आज हमने Hindi Poem On God को प्रस्तुत किया। इन कविताओं में आध्यात्मिक भाव बखूबी उभरकर सामने आया। इन्हें पढ़कर आपके मन में ईश्वर के प्रति आस्था का भाव जरूर जगा होगा। सुकूँ और शांति का अहसास आपके मन को कितना हुआ है, ये हमें comment में बताना ना भूलें। उम्मीद करते हैं ये ईश्वर पर कविता आपके दिल को छू गई होगी। आप ऐसी ही Devotional Poem और हर तरह की Poetry के लिए हमारे प्लेटफॉर्म को रोज़ाना विजिट कर सकते हैं। आशा करते हैं कि फिर जल्द एक नई कविता के साथ आपसे मुलाकात होगी, तब तक आप और भी कविताओं और शायरियों का आनन्द ले सकते हैं।

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