भुखमरी पर कविता | Bhukhmari Kavita | भूख पर कविता | हिंदी कविता

Bhukhmari Par Kavita
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भुखमरी पर कविता | Bhukhmari Kavita | भूख पर कविता | हिंदी कविता

दोस्तों हिंदी कविता की कड़ी में आज हम भुखमरी पर कविता लेकर प्रस्तुत हुए हैं। भूख शब्द 2 अक्सर का है लेकिन इसकी पीड़ा को जान पाना बहुत मुश्किल काम है। भुखमरी के कारण रोज़ाना गरीबों की मृत्यु हो जाती है। इसके लिए आज हमारे कवियों ने भूख की पीड़ा बताते हुए भूख पर कविता लिखी है। एक भूखे इंसान को किस तरह शारिरिक पीड़ा को भोगना पड़ता है और उसकी क्या स्थिति रहती है, ये आपको जानने को मिलेगा। उम्मीद है भुखमरी के लिए कविता जो हम प्रस्तुत कर रहे हैं, आपकी आंखों में आंसू ला देगी। अगर ये Hindi Poems पसन्द आये, तो Share जरूर करियेगा।

भुखमरी पर कविता – कैसे बताएं यह भुखमरी

निगाहों में एक आँह सी भरी थी,
जैसे किसी ने शिकायत सी करी थी,
भले ही लोगों को समझ ना आया हो,
लेकिन कैसे बताएं यह भुखमरी थी।

Bhukhmari Par Kavita
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उस चेहरे पर एक भाव बड़ा था,
अपने परिवार से दूर खड़ा था,
जिंदगी से उसकी जंग बड़ी थी,
लेकिन कैसे बताएं यह भुखमरी थी।

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भगवान यह तेरा कैसा विधान था,
शिकायत करना ही लगा आसान था,
अपनी तो खाली सबकी भरी थी,
लेकिन कैसे बताएं यह भुखमरी थी।

- अरुण साहू

भुखमरी कविता – भुखमरी की मार है

चंद ख़ूनी पंजों में आज कैद क्यों है रोटियां
है बिलखते बेटे बेटी भूखे पेट की बोटियां,
छीनकर चंद लोग खुश हैं हमारे हिस्से को,
कर तबाह झोपड़ियों को आज खुश है कोठियां।

लाख चालें चल तू जीवन के शतरंजी खेल में,
चाल पर भारी पड़ेगी रब की क़हर की गोटियां,
कर ले चाहे तू जमा दुनिया भर की दौलतें,
खानी तो तुझको पड़ेगी दाल और ये रोटियां।

हर तरफ हाहाकार है और भुखमरी की मार है,
है पड़ी सुनसान राहें सूनी दफ्तरों की कोठियां,
पा ले थोड़ा पूण्य भरके गरीबों के भूखे पेट को,
क्या करेगा कर खड़ा सिक्कों की ऊँची चोटियां।

देखा है कूड़े से उठाकर खाते हुए भूखे इंसान को,
लाचार भूख के मारों ने बेची है अपनी ही बेटियां,
कर ली अपनी पैठ ऊँची काट के हक गरीबों का,
और गोदामों में अनाजों की भर रखी है बोरियां।

चल पड़े भूखे कदम राहों में कफ़न सर ओढ़े हुए,
भूखे मरने से अच्छा है खाले सीने पर तेरी गोलियां,
है अभी भी वक़्त बचा लो मानवता को उजड़ने से,
वरना धरी रह जाएगी तेरे गोदामों की भरी बोरियां।

- राम सिंगार "देवदूत"

भूख पर कविता – भूख के विरुद्ध

भूख की उबाल अदहन में
खदकते चावल से होती है
बहुत अधिक
इसलिए बार बार जीतती है भूख।

बदहजमी और भूख मिटाने वाली
दवा के बीच एक अदर पेट है
जो लड़ता है रोटी से।

दिन में दो तीन बार
बड़ी तीव्रता के साथ
इसे महसूस किया जा सकता है।

उस भूख की तीव्रता को
मापा जाना चाहिये
जिसे नहीं मिलती
दो वक़्त की रोटी।

पकते हुए चावल के साथ साथ
पकती है तुम्हारी उम्र
जैसे कोई फल हो
अब गिरे तब गिरे मेरी संतोषी
भात के पकने तक
तुम्हें रखना होगा धैर्य।

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रोटी की लड़ाई में
पानी को बनना पड़ता है
भोजन का विकल्प
बार बार।

मुझे सपने में दिखाई देते हैं
भूख से तड़पते बच्चे
मैं पकाना चाहती हूं
कटोरी भर भात
भूख के विरुद्ध।

- प्रतिभा श्री

Bhukhmari Kavita – भूखा पेट भी लड़ता रहा

वो मासूम सा खुद पर रोता रहा,
भूखा पेट भी खुद से लड़ता रहा।

जो उम्मीदें थी उसकी खत्म हो गयी,
चाहत उसकी ही अब जख़्म हो गयी,
बेबस भूखे पेट रोज सोता रहा।

वो मासूम सा खुद पर रोता रहा,
भूखा पेट भी खुद से लड़ता रहा।

ख़ुदा कैसे लिखा मेरी किस्मत को,
क्या तू देख रहा है मेरी हिम्मत को,
परिवार की ख़ातिर खुद को बोता रहा।

वो मासूम सा खुद पर रोता रहा,
भूखा पेट भी खुद से लड़ता रहा।

धूप कड़ी थी मेहनत करता गया,
भूखे बच्चें ना सोये पाई जोड़ता गया,
दो वक़्त की रोटी को तरसता रहा।

वो मासूम सा खुद पर रोता रहा,
भूखा पेट भी खुद से लड़ता रहा।

कैसे गुजरते हैं ये दिन ना पूछो खुदा,
लाचारी से अच्छा दुनिया से कर दे जुदा,
राह दिखा दे मुझे विनती करता रहा।

वो मासूम सा खुद पर रोता रहा,
भूखा पेट भी खुद से लड़ता रहा।

- जितेन्द्र "हमदर्द"

Bhukhmari Par Kavita – दो वक़्त की उसकी थाली

पीकर नीर रातों को यूं न कोई सोता,
गुरबत अगर न होती भूखा कोई न होता।

उचित हक मिल जाता अपनी मेहनत का,
कठिन परिश्रम करने वाला यूं खामोश न होता।

लहू को पसीना बनाकर भी सपने न संजोता,
होते बंगले गाड़ी भी चहल पहल खूब होता।

कुंठित है पर जीवन उसका क्यों परिवार है रोता,
जिसके बदौलत फरेबों के घर नित नित जश्न है होता।

तृप्त न होती भूख की अग्नि होली और दीवाली को,
लूट औरों ने है खाया दो वक़्त की उसकी थाली को।

सोचो ऐ मानव ज़रा उस जगह अगर तू होता,
कैसी होती हालत तेरी क्या तू विवश न होता।

- दिग्विजय सिंह त्यागी

भुखमरी के लिए कविता – अन्न का भंडारण घरों में

यहाँ हर किसी की लड़ाई रोटी की है,
अमीर गरीब के बीच खाई रोटी की है।

भुखमरी से मर रहे हैं यहाँ सब लोग,
फिर भी इंसानों में हाथा पाई रोटी की है।
Bhukh Par Kavita
Bhukh Par Kavita
जमा खोरी कर अन्न का भंडारण घरों में है,
और भूखों को देते समय तुलाई रोटी की है।

एक वक़्त का भोजन कुछ के नसीब में नहीं,
बिना खाये मरने वालों की जुदाई रोटी की है।

पलायन कर दूर जा रहे हैं सब लोग यहाँ से,
सूनापन है चारो ओर क्योंकि विदाई रोटी की है।

गजब खेल है भूखमरी का

सारा खेल है भूखमरी का,
गजब खेल है भूखमरी का।

कोई बटर लगा के है खाता,
तो कोई सूखी भी न है पाता।

गजब खेल है ...........

चोरी करते भूखमरी के खातिर,
तो कुछ बन जाते अपराधी शातिर।

भूखा पेट ही कराता भष्ट्राचारी,
कुछ वे मन अमीरों की करते चकारी।

गजब खेल है .............

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कोई अधिक पा इसे है फेंकता,
तो गरीब बिन भोजन कर मरता।

सारा जग इसी के पीछे है भागता,
भूखा पेट ही है जो आपस में लड़वाता।

गजब खेल है .............

- प्रमोद कुमार चौहान

Bhukhmari Poem – मैं भुखमरी हूं

तलाश नहीं मुझे किसी बाजार में,
मिलूंगा नहीं किसी मंदिर मज़ार में।

मैं तो भुखमरी हूं बस रहती हूं गरीबों के दरबार में,
कोई नहीं पूछने वाला दिखती रोज़ अखबार में।

देश तो पैसा बहा देता है व्यर्थ चाँद की तस्वीर पर,
भूखे पेट की तकलीफ सहते रोते हम तक़दीर पर।

बस कफन देते गरीब को मैंने घटना ऐसी देखी कई बार है,
अमीर शान से रहते गरीबों की होती हमेशा हार है।

किसी की कीमत करोड़ो में होती है,
कोई खाली पेट पर हाथ रख सोते हैं,
गरीबों की हालत देख मेरा मन दु:खी है,
भुखमरी में रहते गरीब ना सुखी है।

बिजली पानी दवा मुफ़्त है,
कुर्सी के लिए यही उपयुक्त है,
खाली पेट को रोटी क्यों नहीं देते,
क्या इतनी क्षमता नहीं सरकार में,

मैं तो भुखमरी हूं बस रहती हूं गरीबों के दरबार में,
कोई नहीं पूछने वाला दिखती रोज़ अखबार में।

- बिलाल राय "आसनसोल"

Conclusion : आज हमने हिंदी कविता के संग्रह में भुखमरी पर कविता प्रस्तुत की। इन कविताओं में हमारे कवियों ने बखूबी एक भूखे इंसान की पीड़ा को व्यक्त किया। वाकई आज भुखमरी की दशा को दर्शाती हुई ये कविताएं हकीकत को बयां कर रही है। हमें उम्मीद है भूख पर ये कविताएं आपके हृदय को स्पर्श कर गई होगी। इन कविताओं के बारे में आपका क्या खयाल है, हमें Comment Box में ज़रूर बताइयेगा। अगर आप भी लोगों को भुखमरी के लिए Aware करना चाहते हैं, तो एक जागरूक नागरिक होने के नाते इन कविताओं को Share जरूर करें शायद हमारे एक share से भूखे को 2 वक़्त का खाना नसीब हो जाये।

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