15 August 2020 Poem In Hindi | 15 August Kavita | 15 अगस्त कविता

15 august poem
15 august poem

नमस्ते दोस्तों, आज बहुत दिनों बाद आज फिर हम “हिंदी कविता” की सीरीज शुरू कर रहे हैं। आज “15 august 2020 Poem In Hindi” लेकर आए हैं। अगर आप भी आने वाली 15 अगस्त के लिए कविता खोज रहे हैं, तो आज पूरा संग्रह मिलेगा। पसन्द आये तो हमारी post को Share जरूर करें।

आजादी का दिन

आज आजादी का दिन है उत्सव है सबसे बड़ा,
तिरंगा फहराता एक साथ पूरा भारत है खड़ा।
अधरों पर मुस्कान लिए बैठी यह आबादी है,
गुलाम नहीं कोई सबको यहां पर आजादी है।

आज विकासशील है राष्ट्र हमारा,
सबको अखंड भारत है प्यारा।
आज यहां अधिकार सब समान है,
ना कोई ऊंचा ना नीचा सबका सम्मान है।

कुछ दशक बीते आजादी के पर उससे पहले क्या था?
आज मुस्कुराते हुए चेहरे हैं पर उससे पहले क्या था?
आज पढ़ा लिखा सशक्त भारत है पर उससे पहले क्या था?
आज़ादी का चमकता सूर्य है पर उससे पहले क्या था??
15 august poem
15 august poem
पहले चारों ओर गुलामी का अंधेरा था,
यहां तो सिर्फ आतंक का बसेरा था,
ज़ुल्म ढहाता जालिम गोरा चेहरा था,
अपने भारत को अंग्रेजों ने घेरा था।

मासूमों पर होते थे अत्याचार,
बच्चे बूढ़े सहते थे कोड़ों की मार।
मजबूरों पर जल्लाद करते थे वार,
तब अपना यह भारत था लाचार।

सन् सत्तावन की चिंगारी से आजादी का दीप जला,
बरसों से रोती आंखों में स्वतंत्रता का स्वप्न पला।
एक अलख उठी एक आस जगी कि अब भाग्य है बदला,
पर गद्दारों के भीतरघातों से आजादी का यह समर टला।

बुझ गई थी मशालें पर कई चिंगारियां धधक उठी थी,
प्राण देकर भी शत्रु का रक्त बहाने तलवारे कई खड़ी थी।
आजादी के दिव्य हवन में कई जाने आहुतियां बनी थी,
हमें आजादी देने को उन वीरों ने अपनी बलियां दी थी।

कितने वीर हंसते हंसते फांसी के फंदे पर झूले थे,
माटी का कष्ट मिटाने को अपने सुख-दु:ख भूले थे।
जलियांवाला बाग में कितनों ने खाई थी गोलियां,
फिर भी आजादी पाने को चली उन वीरों की टोलियां।

मां भारती ने कितने सपूतों को खोया,
कितने शहीदों के शवों पर भारत रोया।
आजादी लाने को कितनों ने अपना बलिदान दिया,
मरकर भी उन वीरों ने आजादी का बीज बोया।

आजादी लाने को डटी वीरों की सेना उन्मादी थी,
कितने वीरों को खोकर हमें मिली यह आजादी थी।
जिसने भी जाना उन क्रांतिवीरों को उसने शीश झुकाया है,
कद्र करो आजादी की उन्होंने रक्त से इसका मूल्य चुकाया है।

- निरंजन राठौड़ ‘नर’

आजादी

आओ हम सब
आजादी का
जश्न मनाएं
भारत माता के चरणों में
मिल शीश झुकाएं
हाय ! कितनी मुश्किल से
पाई हमने, यह आजादी
निर्माणों की, बात करें
अब करें नहीं बर्बादी


स्वतंत्रता के, गीत सुने और
बोले वंदे मातरम
सत्यमेव पहचान हमारी
संस्कृति है सबसे न्यारी
यह है , सबसे सुंदरम
नमन, उन्हें भी कर ले
जिसने आजादी के खातिर
इंकलाब का नारा दे


रंग दे बसंती , चोला कह
झूले फांसी के फंदे पर
झुके नहीं, गोरों के आगे
नाम से जिनके, गोरे थरथर कांपे
आओ मिल हम सब
राष्ट्र भक्तों को नमन करें
चरणों में उनके
श्रद्धा सुमन अर्पित करें।

- प्रमोद कुमार चौहान

हिन्दुस्तान जिंदाबाद

नफरत प्यार से कभी,
बड़ी हो नही सकती।
आग पानी से अधिक,
शीतल हो नही सकती।

माना कि मोहब्बत वतन पर,
हम जता नही पाते।
पर हमारी देशभक्ति,
किसी से कम हो नही सकती।

चाहे जितने भी तुम,
हो सके सितम कर लो।
इस मिट्टी से मेरी रूह,
अलग हो नही सकती।

लहू हमारा भी क़ुर्बान,
हुआ है इस वतन पर।
गंगा जमुना की तहजीब,
कम हो नही सकती।

नफरत बालों चाहे जितने भी,
जुल्म कर लो तुम।
पर हिन्दु मुस्लिम एकता,
कम हो नही सकती।

आजादी की लड़ाई,
हम सबने मिल कर लड़ी है।
इसमे किसी की शहादत,
धर्म से आंकी जा नही सकती।

हिन्दुस्तान जिंदाबाद है,
था और हमेशा रहेगा।
अब गद्दारों की जगह,
मेरे देश मे हो नही सकती।

- प्रमोद कुमार चौहान

आज के इस लेख में हमने “15 august 2020 Poem In Hindi” पेश की। ऐसी ही Poetry पढ़ने के लिए website को रोज़ाना विजिट करें।

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